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अलसी के असरकारी नुस्खे

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अलसी के असरकारी नुस्खे संग्रहकर्ता – महेश खंडेलवाल , वृन्दाबन

अलसी में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, केरोटिन, थायमिन, राइबोफ्लेविन और नियासिन पाए जाते हैं। यह गनोरिया, नेफ्राइटिस, अस्थमा, सिस्टाइटिस, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, कब्ज, बवासीर, एक्जिमा के उपचार में उपयोगी है। अलसी को धीमी आँच पर हल्का भून लें। फिर मिक्सर में दरदरा पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भरकर रख लें। रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच पावडर पानी के साथ लें। इसे सब्जी या दाल में मिलाकर भी लिया जा सकता है।

इसे अधिक मात्रा में पीस कर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह खराब होने लगती है। इसलिए थोड़ा-थोड़ा ही पीस कर रखें। अलसी सेवन के दौरान पानी खूब पीना चाहिए। इसमें फायबर अधिक होता है, जो पानी ज्यादा माँगता है। एक चम्मच अलसी पावडर को 360 मिलीलीटर पानी में तब तक धीमी आँच पर पकाएँ जब तक कि यह पानी आधा न रह जाए। थोड़ा ठंडा होने पर शहद या शकर मिलाकर सेवन करें।

सर्दी, खाँसी, जुकाम में यह चाय दिन में दो-तीन बार सेवन की जा सकती है। अस्थमा में भी यह चाय बड़ी उपयोगी है। अस्थमा वालों के लिए एक और नुस्खा भी है। एक चम्मच अलसी पावडर आधा गिलास पानी में सुबह भिगो दें। शाम को इसे छानकर पी लें। शाम को भिगोकर सुबह सेवन करें। गिलास काँच या चाँदी का होना चाहिए।

अलसी की पिन्नी – Alsi Pinni Recipe – Alsi Ladoo Recipe

सर्दियों के मौसम ने दस्तक दे दी है. इस मौसम में आपके परिवार को अधिक केयर की जरूरत है. अलसी (Linseeds or Flax Seeds) से बने खाद्य पदार्थ (Alsi Recipes) आपके परिवार को सर्दी जुकाम खांसी आदि से लड़ने की प्रतिरोधात्मक शक्ति देते हैं.


अलसी में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 नाम के अम्ल होते हैं जो आपके शरीर के कोलोस्ट्रोल को संतुलित करते हैं. अपने पदार्थ गुण में अलसी के बीज अखरोट और बादाम को मात देते हैं लेकिन मूल्य में बहुत सस्ते. आयुर्वेद के अनुसार अलसी के बीज (Linseed or Flax Seeds) वात, पित्त और कफ को संतुलित करते हैं

अलसी की पिन्नी (Alsi Pinni) सर्दियो में खाई जाने वाली पारम्परिक पौष्टिक मिठाई है. अलसी की पिन्नी सर्दियों में बनाकर रख लीजिये, रोजाना 1-2 अलसी की पिन्नी (Alsi Ki Pinni) खाइये, सर्दी, जुकाम, खासी, जोड़ों के दर्द सभी में फायदा पहुंचाती है., तो आइये अलसी की पिन्नी बनाना (Alsi Ladoo or Alsi Ki Barfi) शुरू करें.

आवश्यक सामग्री – Imgredients for Alsi Ki Pinni

अलसी – 500 ग्राम ( 4 कप)

गेहूं का आटा – 500 ग्राम ( 4 कप)

देशी घी – 500 ग्राम ( 2/1/2 कप)

गुड़ या चीनी – 800 ग्राम ( 4 कप)

काजू – 100 ग्राम

बादाम – 100 ग्राम

पिस्ता – 1 टेबल स्पून

किशमिश – 1 टेबल स्पून

गोंद – 100 ग्राम

इलाइची – 15 (छील कर कूट लीजिये)

विधि – How to make Alsi Ki Pinni
अलसी (Linseeds or Flax Seeds) को थाली में डालकर अच्छी तरह छान बीन कर साफ कर लीजिये.

अलसी को सूखी कढ़ाई में डालिये, रोस्ट कीजिये (अलसी रोस्ट करते समय चट चट की आवाज करती है) और मिक्सी से पीस लीजिये. इन्हें थोड़े दरदरे पीसिये, एकदम बारीक मत कीजिये.

गेंहू के आटे को आधा घी डाल कर ब्राउन होने तक और अच्छी महक आने तक भून लीजिये. भुने आटे को किसी थाली या ट्रे में निकाल कर रख लीजिये.

गोंद को बारीक तोड़ कर बचे हुये घी में तलिये, गरम घी में थोड़ा गोंद डालिये, गोंद फूल जाता है, हल्का ब्राउन होने पर थाली में निकालिये और सारा गोंद इसी तरह तल कर निकाल लीजिये. ठंडा होने पर तले हुये गोंद को चकले पर या किसी थाली में बेलन की सहायता से दबा दबा और बारीक कर लीजिये.

गोद तलने के बाद जो घी बचा हुआ है उसमें पिसी हुई अलसी को डालिये और कलछी से चला चला कर मीडियम और धीमी आग पर अच्छी महक आने तक भूनिये और थाली में निकाल लीजिये.

काजू, बादाम और पिस्ते छोटा छोटा काट लीजिये.

गुड़ या चीनी चीनी की मात्रा का आधा पानी मिलाकर कढ़ाई में डालिये और चाशनी बनने के लिये रखिये. चीनी घुलने तक चमचे से चलाइये और 1 तार की चाशनी तैयार कर लीजिये(चाशनी के टैस्ट के लिये चमचे से 1 बूंद चाशनी प्याली में गिरायें और ऊंगली अंगूठे के बीच चिपका कर देंखें कि जब ऊंगली और अंगूठे को अलग करें तो चाशनी से तार निकलना चाहिये). आग बन्द कर दीजिये.

चाशनी में भुना आटा, भुनी अलसी, काटे हुये मेवे, गोंद और इलाइची डाल कर अच्छी तरह मिला दीजिये. हल्का गरम रहने पर हाथ से थोड़ा थोड़ा (एक नीबू के बराबर) मिश्रण निकाल कर लड्डू बनाकर थाली में रखिये. सारे मिश्रण से लड्डू बनाकर तैयार कर लीजिये या हाथ से चौकोर आकार देते हुये बरफी बना लीजिये.

अगर आप बरफी जमाना चाहते हैं तब आप गरम मिश्रण को घी से की चिकनी की गई थाली में डालिये और एकसार करके जमा दीजिये. आधा घंटे या बरफी के जमने के बाद अपने मन पसन्द टुकड़ों में काट लीजिये.

अलसी की पिन्नी तैयार है, अलसी की पिन्नी को खाइये और बची हुई पिन्नी किसी एअर टाइट कन्टेनर में भर कर रख लीजिये और 1 महिने तक रोजाना अलसी की पिन्नी (Alsi Ki Pinni) खाइये.

सावधानियां
गोंद को तलते समय आग धीमी और मीडियम ही रखें, तेज आग पर गोंद अच्छा नहीं फूलता, ऊपर से भुनता है और अन्दर से कच्चा निकल आता है.

पिसी अलसी को मीडियम और धीमी आग पर ही भूनें (तेज आग पर भूनने से जलने का खतरा है).

चाशनी बनाते समय ध्यान रखें कि वह सही बने, चीनी पानी में घुलने के बाद ही चाशनी का टैस्ट कीजिये और 1 तार की चाशनी बना लीजिये, चाशनी ज्यादा होने पर, वह तुरन्त जमने लगेगी और पिन्नी नहीं बन सकेगी, अगर चाशनी में तार नहीं बन रहा हो तो वह जमेगी ही नहीं और पिन्नी नरम रहेगी.

सूखे मेवे आप अपने पसन्द से कम ज्यादा कर सकते हैं, आपको जो मेवा पसन्द हो वह डाल सकते हैं और जो मेवा न पसन्द हो वह हटा सकते हैं.

अलसी का एक और चमत्कार

लसी के एक और चमत्कार से डा.मनोहर भंडारी ने विगत दिनों साक्षात्कार कराया। जबलपुर-नागपुर रोड पर पाँच किलो मीटर दूर एक जैन तीर्थ है, पिसनहारी मांडिया। यह तीन सौ फुट ऊँची एक पहाड़ी पर बना है। चार सौ सीढ़ियाँ चढ़ कर उपर पहुँचना पड़ता है। डा.भंडारी जबलपुर मेडिकल कालेज में प्राध्यापक हैं और अक्सर पिसनहारी जाते रहते हैं। वहाँ एक मुनीमजी हैं, जिनके घुटनों में दर्द रहता था। एक दिन बोले डाक्टर साहब कोई दवा बताइए। सीढ़ियाँ चढ़ने में बड़ी तकलीफ होती है। डा.भंडारी ने उन्हें अलसी खाने की सलाह दी। मुनीमजी ने दूसरे ही दिन से अलसी का नियमित सेवन शुरू कर दिया। कुछ दिनों बाद जब डाक्टर भंडारी पिसनहारी मांडिया गए तो, मुनीमजी ने बड़ी प्रसन्नता के साथ बताया-डाक्टर सा.आपका अलसी वाला नुस्खा तो बड़ा कारगर रहा। आपके बताए अनुसार करीब तीन चम्मच अलसी रोज पीस कर खाता हूँ। घुटनों का दर्द गायब हो चुका है। चार सौ सीढ़ियाँ रोज चढ़ता हूँ। अब कोई कष्ट नहीं होता।

लाभकारी अलसी
अलसी, तीसी, अतसी, कॉमन फ्लेक्स और वानस्पतिक लिनभयूसिटेटिसिमनम नाम से विख्यात तिलहन अलसी के पौधे बागों और खेतों में खरपतवार के रूप में तो उगते ही हैं, इसकी खेती भी की जाती है। इसका पौधा दो से चार फुट तक ऊंचा, जड़ चार से आठ इंच तक लंबी, पत्ते एक से तीन इंच लंबे, फूल नीले रंग के गोल, आधा से एक इंच व्यास के होते हैं।

इसके बीज और बीजों का तेल औष्ाधि के रूप में उपयोगी है। अलसी रस में मधुर, पाक में कटु (चरपरी), पित्तनाशक, वीर्यनाशक, वात एवं कफ वर्घक व खांसी मिटाने वाली है। इसके बीज चिकनाई व मृदुता उत्पादक, बलवर्घक, शूल शामक और मूत्रल हैं। इसकातेल विरेचक (दस्तावर) और व्रण पूरक होता है।

अलसी की पुल्टिस का प्रयोग गले एवं छाती के दर्द, सूजन तथा निमोनिया और पसलियों के दर्द में लगाकर किया जाता है। इसके साथ यह चोट, मोच, जोड़ों की सूजन, शरीर में कहीं गांठ या फोड़ा उठने पर लगाने से शीघ्र लाभ पहुंचाती है। एंटी फ्लोजेस्टिन नामक इसका प्लास्टर डॉक्टर भी उपयोग में लेते हैं। चरक संहिता में इसे जीवाणु नाशक माना गया है। यह श्वास नलियों और फेफड़ों में जमे कफ को निकाल कर दमा और खांसी में राहत देती है।

इसकी बड़ी मात्रा विरेचक तथा छोटी मात्रा गुर्दो को उत्तेजना प्रदान कर मूत्र निष्कासक है। यह पथरी, मूत्र शर्करा और कष्ट से मूत्र आने पर गुणकारी है। अलसी के तेल का धुआं सूंघने से नाक में जमा कफ निकल आता है और पुराने जुकाम में लाभ होता है। यह धुआं हिस्टीरिया रोग में भी गुण दर्शाता है। अलसी के काढ़े से एनिमा देकर मलाशय की शुद्धि की जाती है। उदर रोगों में इसका तेल पिलाया जाता हैं।

अलसी के घरेलू उपयोग
अलसी के तेल और चूने के पानी का इमल्सन आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है।
पथरी, सुजाक एवं पेशाब की जलन में अलसी का फांट पीने से रोग में लाभ मिलता है।
अलसी के कोल्हू से दबाकर निकाले गए (कोल्ड प्रोसेस्ड) तेल को फ्रिज में एयर टाइट बोतल में रखें। स्नायु रोगों, कमर एवं घुटनों के दर्द में यह तेल पंद्रह मि.ली. मात्रा में सुबह-शाम पीने से काफी लाभ मिलेगा।

इसी कार्य के लिए इसके बीजों का ताजा चूर्ण भी दस-दस ग्राम की मात्रा में दूध के साथ प्रयोग में लिया जा सकता है। यह नाश्ते के साथ लें।

बवासीर, भगदर, फिशर आदि रोगों में अलसी का तेल (एरंडी के तेल की तरह) लेने से पेट साफ हो मल चिकना और ढीला निकलता है। इससे इन रोगों की वेदना शांत होती है।

n अलसी के बीजों का मिक्सी में बनाया गया दरदरा चूर्ण पंद्रह ग्राम, मुलेठी पांच ग्राम, मिश्री बीस ग्राम, आधे नींबू के रस को उबलते हुए तीन सौ ग्राम पानी में डालकर बर्तन को ढक दें। तीन घंटे बाद छानकर पीएं। इससे गले व श्वास नली का कफ पिघल कर जल्दी बाहर निकल जाएगा। मूत्र भी खुलकर आने लगेगा।

इसकी पुल्टिस हल्की गर्म कर फोड़ा, गांठ, गठिया, संधिवात, सूजन आदि में लाभ मिलता है।

- वैद्य हरिमोहन शर्मा

प्राकृतिक सुपर फूड : अलसी

ताजगी देता है अलसी का सेवन

अलसी के बीज हल्की तैलीय गंधयुक्त होते हैं जिनमें मुख्य रूप से ग्लिसराइड्स व अनेक महत्वपूर्ण वसीय अम्ल जैसे लिनोलिक व लिनोलेनिक एसिड, पामिटिक, स्टियरिक, ओलिक एसिड के अलावा आमेगा 3 फेटी एसिड जो हृदय को स्वस्थ रखते हैं आदि पाए जाते हैं। इसके अलावा अलसी में कुछ मात्रा में चीनी, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, लोहा, जिंक फॉस्फोरस भी पाया जाता है। इसमें कोलेस्ट्रॉल व सोडियम की मात्रा अत्यंत कम तथा रेशे की मात्रा प्रचुर होती है।

यूनाइटेड स्ट्रेट्रम के कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अलसी के बीजों में 27 प्रकार के कैंसररोधी तत्व खोजे जा चुके हैं। अलसी में पाए जाने वाले ये तत्व कैंसररोधी हार्मोन्स को प्रभावी बनाते हैं, विशेषकर पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर व महिलाओं में स्तन कैंसर की रोकथाम में अलसी का सेवन कारगर है।

अलसी के सेवन से इतने लाभ प्राप्त होने के कारण ही इसे आजकल सुपर-फूडकी श्रेणी में रखा जाने लगा है। शोध अध्ययन बताते हैं कि अन्य भोज्य पदार्थों की तुलना में अलसी के बीजों में प्लांट हार्मोन लिगनन्म की मात्रा 800 गुना अधिक होती है। जो कैंसर से बचाव व ह्रदय को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं।

फायदे
ऊर्जा
, स्फूर्ति व जीवटता प्रदान करता है।
तनाव के क्षणों में शांत व स्थिर बनाए रखने में सहायक है।
कैंसररोधी हार्मोन्स की सक्रियता बढ़ाता है।
रक्त में शर्करा तथा कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है।
जोड़ों का कड़ापन कम करता है।
प्राकृतिक रेचक गुण होने से पेट साफ रखता है।
हृदय संबंधी रोगों के खतरे को कम करता है।

उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है।
त्वचा को स्वस्थ रखता है एवं सूखापन दूर कर एग्जिमा आदि से बचाता है।
बालों व नाखून की वृद्धि कर उन्हें स्वस्थ व चमकदार बनाता है।
इसका नियमित सेवन रजोनिवृत्ति संबंधी परेशानियों से राहत प्रदान करता है। मासिक धर्म के दौरान ऐंठन को कम कर गर्भाशय को स्वस्थ रखता है।
अलसी का सेवन त्वचा पर बढ़ती उम्र के असर को कम करता है।
अलसी का सेवन भोजन के पहले या भोजन के साथ करने से पेट भरने का एहसास होकर भूख कम लगती है। इसके रेशे पाचन को सुगम बनाते हैं
, इस कारण वजन नियंत्रण करने में अलसी सहायक है।
चयापचय की दर को बढ़ाता है एवं यकृत को स्वस्थ रखता है।
प्राकृतिक रेचक गुण होने से पेट साफ रख कब्ज से मुक्ति दिलाता है।

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डायबिटीज के नियंत्रण की कुंजी- अलसी

पिछले कुछ दशकों में भारत समेत पूरे विश्व में डायबिटीज टाइप-2 के रोगियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है व अब तो यह किशोरों और बच्चों को भी अपना शिकार बना रही है। डायबिटीज एक महामारी का रुप ले चुकी है। आइये हम जानने की कोशिश करते हैं कि पिछले कुछ दशकों में हमारे खान-पान, जीवनचर्या या वातावरण में ऐसा क्या बदलाव आया है।

शोधकर्ताओं के अनुसार जब से परिष्कृत यानी “रिफाइन्ड तेल” (जो बनते समय उच्च तापमान, हेग्जेन, कास्टिक सोडा, फोस्फोरिक एसिड, ब्लीचिंग क्ले आदि घातक रसायनों के संपर्क से गुजरता है), ट्रांसफेट युक्त पूर्ण या आंशिक हाइड्रोजिनेटेड वसा यानी वनस्पति घी (जिसका प्रयोग सभी पैकेट बंद खाद्य पदार्थों व बेकरी उत्पादनों में धड़ल्ले से किया जाता है), रासायनिक खाद, कीटनाशक, प्रिजर्वेटिव, रंग, रसायन आदि का प्रयोग बढ़ा है तभी से डायबिटीज के रोगियों की संख्या बढ़ी है। हलवाई और भोजनालय भी वनस्पति घी या रिफाइन्ड तेल का प्रयोग भरपूर प्रयोग करते हैं और व्यंजनों को तलने के लिए तेल को बार-बार गर्म करते हैं जिससे वह जहर से भी बदतर हो जाता है। शोधकर्ता इन्ही को डायबिटीज का प्रमुख कारण मानते हैं।

पिछले तीन-चार दशकों से हमारे भोजन में ओमेगा-3 वसा अम्ल की मात्रा बहुत ही कम हो गई है और इस कारण हमारे शरीर में ओमेगा-3 व ओमेगा-6 वसा अम्ल यानी हिंदी में कहें तो ॐ-3 और ॐ-6 वसा अम्लों का अनुपात 1:40 या 1:80 हो गया है जबकि यह 1:1 होना चाहिये। यह भी डायबिटीज का एक बड़ा कारण है। डायबिटीज के नियंत्रण हेतु आयुवर्धक, आरोग्यवर्धक व दैविक भोजन अलसी को “अमृत“ तुल्य माना गया है।
अलसी के तेल का अदभुत संरचना और ॐ खंडकी क्वांटम
अलसी के तेल में अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ए.एल.ए.) नामक ओमेगा-3 वसा अम्ल होता है। डा. बुडविज ने ए.एल.ए. और एल.ए. वसा अम्लों की अदभुत

संरचना का गूढ़ अध्ययन किया था। ए.एल.ए. में 18 कार्बन के परमाणुओं की लड़ी या श्रृंखला होती है जिसके एक सिरे से , जिसे ओमेगा एण्ड कहते हैं, मिथाइल (CH3) ग्रुप जुड़ा रहता है और दूसरे से जिसे डेल्टा एण्ड कहते हैं, कार्बोक्सिल (COOH) ग्रुप जुड़ा रहता है। ए.एल.ए. में तीन द्वि बंध क्रमशः तीसरे, छठे और नवें कार्बन परमाणु के बाद होते हैं। चुंकि ए.एल.ए. में पहला द्वि बंध तीसरे और एल.ए. में पहला द्वि बंध छठे कार्बन के बाद होता है इसीलिए इनको क्रमशः ओमेगा-3 और ओमेगा-6 वसा अम्ल कहते हैं। ए.एल.ए. और एल.ए. हमारे शरीर में नहीं बनते, इसलिए इनको “आवश्यक वसा अम्ल” कहते हैं तथा इनको भोजन के माध्यम से लेना आवश्यक है। आवश्यक वसा अम्लों की कार्बन लड़ी में जहां द्वि-बंध बनता है और दो हाइड्रोजन अलग होते हैं, उस स्थान पर इलेक्ट्रोनों का बादलनुमा समुह, जिसे पाई-इलेक्ट्रोन भी कहते हैं, बन जाता हैं और इस जगह ए.एल.ए. की लड़ मुड़ जाती है। इलेक्ट्रोन के इस बादल में अपार विद्युत आवेश रहता है जो सूर्य ही नहीं बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड से आने वाले प्रकाश की किरणों के सबसे छोटे घटक फोटोन (जो असिमित, गतिशील, अनंत, जीवन शक्ति से भरपूर व ऊर्जावान हैं और अपना रंग, प्रकृति और आवृत्ति बदल सकते हैं) को आकर्षित करते हैं।
ये फोटोन सूर्य से निकल कर, जो 9.3 अरब मील दूर हैं, असीम ऊर्जा लेकर, जीवन की आस लेकर, प्यार की बहार लेकर, खुशियों की सौगात लेकर आते हैं, अपनी लय, ताल व आवृत्ति बदल कर इलेक्ट्रोन, जो अपने कक्ष में निश्चत आवृत्ति पर सदैव गतिशील रहते हैं, की ओर आकर्षित होते हैं, साथ मिल कर नृत्य करते हैं और तब पूरा कक्ष समान आवृत्ति में दिव्य गुंजन करता है और असीम सौर ऊर्जा का प्रवाह होता है। यही है जीवन का अलसी फलसफा, प्रेम का उत्सव, यही है प्रकृति का संगीत। यही है फोटोन रूपी सूर्य और इलेक्ट्रोन रूपी चंद्र का परलौकिक गंधर्व विवाह, यही है शिव और पार्वती का तांण्डव नृत्य, यही है विष्णु और लक्ष्मी की रति क्रीड़ा, यही है कृष्ण और राधा का अंनत, असीम प्रेम।
पाई-इलेक्ट्रोन कोशिकाओं में भरपूर ऑक्सीजन को भी आकर्षित करते हैं। ए.एल.ए कोशिकाओं की भित्तियों को लचीला बनाते हैं जिससे इन्सुलिन का बड़ा अणु आसानी से कोशिका में प्रवेश कर जाता है। ये पाई-इलेक्ट्रोन ऊर्जा का संग्रहण करते हैं और एक केपेसिटर की तरह काम करते हैं। यही जीवन शक्ति है जो हमारे पूरे शरीर विशेष तौर पर मस्तिष्क, आँखों, मांसपेशियों और स्नायु तंत्र की कोशिकाओं में भरपूर ऊर्जा भरती है।
डायबिटीज के रोगी को ऐसे ऊर्जावान इलेक्ट्रोन युक्त अलसी के 30 एम.एल. तेल और 80-100 एम.एल. दही या पनीर को विद्युत चालित हाथ से पकड़ने वाली मथनी द्वारा अच्छी तरह फेंट कर फलों और मेवों से सजा कर नाश्ते में लेना चाहिये। इसे एक बार लंच में भी ले सकते हैं। जिस तरह ॐ में सारा ब्रह्मांड समाया हुआ है ठीक उसी प्रकार अलसी के तेल में संम्पूर्ण ब्रह्मांड की जीवन शक्ति समायी हुई है। इसीलिए अलसी और दही, पनीर के इस व्यंजन को हम ॐ खंड कहते हैं। अलसी का तेल शीतल विधि द्वारा निकाला हुआ फ्रीज में संरक्षित किया हुआ ही काम में लेना चाहिए। इसे गर्म नहीं करना चाहिये और हवा व प्रकाश से बचाना चाहिये ताकि यह खराब न हो। 42 डिग्री सेल्सियस पर यह खराब हो जाता है।
अलसी की फाइबर युक्त स्वास्थयप्रद रोटीः

अलसी ब्लड शुगर नियंत्रित रखती है व डायबिटीज से शरीर पर होने वाले दुष्प्रभावों को कम करती है। डायबिटीज के रोगी को कम शर्करा व ज्यादा फाइबर खाने की सलाह दी जाती है। अलसी व गैहूं के मिश्रित आटे में (जहां अलसी और गैहूं बराबर मात्रा में हो) 50 प्रतिशत कार्ब, 16 प्रतिशत प्रोटीन व 20 प्रतिशत फाइबर होते हैं यानी इसका ग्लायसीमिक इन्डेक्स गैहूं के आटे से काफी कम होता है। जबकी गैहूं के आटे में 72 प्रतिशत कार्ब, 12.5 प्रतिशत प्रोटीन व 12 प्रतिशत फाइबर होते हैं। डायबिटीज पीडित के लिए इस मिश्रित आटे की रोटी सर्वोत्तम मानी गई है।
डायबिटीज के रोगी को रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स जैसे आलू, सफेद चावल, मेदा, चीनी और खुले हुए या पैकेट बंद सभी खाद्य पदार्थ, जंक फूड, फास्ट फूड, सोफ्ट ड्रिंक आदि का सेवन कतई नहीं करना चाहिये। रोज 4 से 6 बार परन्तु थोड़ा-थोड़ा भोजन करना चाहिये। सांयकालीन भोजन सोने के 4-5 घण्टे पहले ग्रहण करना चाहिये। प्याज, लहसुन, गोभी, टमाटर, पत्तागोभी, मेथी, भिण्डी, पालक, बैंगन, लौकी, ऑवला, गाजर, नीबू आदि हरी सब्जीयां भरपूर खानी चाहिये। फलों में जामुन, सेब, संतरा, अंगूर, पपीता, आम, केला आदि सभी फल खाने चाहिये। खाद्यान्न व दालें भी छिलके समेत खाएं। छिलकों में फाइबर व महत्वपूर्ण विटामिन होते हैं। अंकुरित दालों का सेवन अवश्य करें।

रोज सुबह एक घण्टा व शांम को आधा घण्टा पैदल चलना चाहिये। सुबह कुछ समय प्राणायाम, योग व व्यायाम करना चाहिये। रोजाना चुटकी भर पिसी हुई दालचीनी सब्जी या चाय में मिला कर लेना चाहिये। सर्व विदित है कि क्रोमियम और अल्फा-लाइपोइक एसिड शर्करा के चयापचय में सहायक हैं अतः डाटबिटीज के रोगी को रोज 200 माइक्रोग्राम क्रोमियम और 100 माइक्रोग्राम अल्फा-लाइपोइक एसिड लेना ही चाहिये। अधिकतर एंटीऑक्सीडेंट केप्स्यूल में ये दोनो तत्व होते हैं। मेथीदाना, करेला, जामुन के बीज, आंवला, नीम के पत्ते, घृतकुमारी (गंवार पाठा) आदि का सेवन करें। एक कप कलौंजी के बीज, एक कप राई, आधा कप अनार के छिलके और आधा कप पितपाप्र को पीस कर चूर्ण बना लें। आधी छोटी चम्मच कलौंजी के तेल के साथ रोज नाश्ते के पहले एक महीने तक लें।

डायबिटीज के दुष्प्रभावों में अलसी का महत्वः-
हृदय रोग एवं उच्च रक्तचापः-

डायबिटीज के रोगी को उच्च रक्तचाप, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट अटेक आदि की प्रबल संभावना रहती हैं। अलसी हमारे रक्तचाप को संतुलित रखती हैं। अलसी हमारे रक्त में अच्छे कॉलेस्ट्राल (HDL Cholesterol) की मात्रा को बढ़ाती है और ट्राइग्लीसराइड्स व खराब कोलेस्ट्रोल (LDL Cholesterol) की मात्रा को कम करती है। अलसी दिल की धमनियों में खून के थक्के बनने से रोकती है और हृदयाघात से बचाव करती हैं। हृदय की गति को नियंत्रित कर वेन्ट्रीकुलर एरिद्मिया से होने वाली मृत्यु दर को बहुत कम करती है।
नैत्र रोगः-
डायबिटीज के दुष्प्रभावों के कारण आँखों के दृष्टि पटल की रक्त वाहिनियों में कहीं-कहीं हल्का रक्त स्राव और रुई जैसे सफेद धब्बे बन जाते हैं। इसे रेटीनोपेथी कहते हैं जिसके कारण आँखों की ज्योति धीरे-धीरे कम होने लगती है। दृष्टि में धुंधलापन आ जाता है। अंतिम अवस्था में रोगी अंधा तक हो जाता है। अलसी इसके बचाव में बहुत लाभकारी पाई गई है। डायबिटीज के रोगी को मोतियाबिन्द और काला पानी होने की संभावना ज्यादा रहती है। ऑखों में रोजाना एक बूंद अलसी का तेल डालने से हम इन तकलीफों से बच सकते हैं। इससे नजर अच्छी हो जाती हैं, रंग ज्यादा स्पष्ट व उजले दिखाई देने लगते हैं तथा धीरे-धीरे चश्मे का नम्बर भी कम हो सकता है।
वृक्क रोगः-

डायबिटीज का बुरा असर गुर्दों पर भी पड़ता है। गुर्दों में डायबीटिक नेफ्रोपेथी नामक रोग हो जाता है, जिसकी आरंम्भिक अवस्था में प्रोटीन युक्त मूत्र आने लगता है, बाद में गुर्दे कमजोर होने लगते हैं और अंत में गुर्दे नाकाम हो जाते हैं। फिर जीने के लिए डायलेसिस व गुर्दा प्रत्यारोपण के सिवा कोई रास्ता नहीं बचता हैं। अलसी गुर्दे के उत्तकों को नयी ऊर्जा देती है। शिलाजीत भी गुर्दे का कायाकल्प करती है, डायबिटीज के दुष्प्रभावों से गुर्दे की रक्षा करती है व रक्त में शर्करा की मात्रा कम करती है। डायबिटीज के रोगी को शिलाजीत भी लेना ही चाहिये।
पैरः-
डायबिटीज के कारण पैरों में रक्त का संचार कम हो जाता है व पैरों में एसे घाव हो जाते हैं जो आसानी से ठीक नहीं होते। इससे कई बार गेंग्रीन बन जाती है और इलाज हेतु पैर कटवानाक पड़ जाता हैं। इसी लिए डायबिटीज पीड़ितों को चेहरे से ज्यादा अपने पैरों की देखभाल करने की सलाह दी जाती है। पैरों की नियमित देखभाल, अलसी के तेल की मालिश व अलसी खाने से पैरों में रक्त का प्रवाह बढ़ता हैं, पैर के घाव व फोड़े आदि ठीक होते हैं। पैर व नाखुन नम, मुलायम व सुन्दर हो जाते हैं।

अंतिम दो शब्दः-
डायबिटीज में कोशिका स्तर पर मुख्य विकृति इन्फ्लेमेशन या शोथ हैं। जब हम स्वस्थ आहार-विहार अपना लेते हैं और अलसी सेवन करते हैं तो हमें पर्याप्त ओमेगा-3 ए.एल.ए. मिलता हैं और हमारे शरीर में ओमेगा-3 व ओमेगा-6 वसा अम्ल का अनुपात सामान्य हो जाता है व डायबिटीज का नियंत्रण आसान हो जाता है और इंसुलिन या दवाओं की मात्रा कम होने लगती है।

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Gump के द्वारा
July 12, 2016

&lrv<Pte;ious Post    Next Post>> Stumble! for WP Filed Under: Blogs Turned Into Books Tagged With: awesome things, blog-to-book, blog-to-book deals, blogged book ideas, Neil Pasricha

akhilesh के द्वारा
July 8, 2016

अलसी काै बगैर सैकै खा सकते है या नही

Raj Kumar Sinha के द्वारा
April 20, 2015

ऊपगे गे ो नाीब हेा िहत 

    Lettice के द्वारा
    July 12, 2016

    I prefer links to open in a new window, eslileapcy those in the middle of a post. There was a plugin, or code of some sort, that allows readers to choose which method they prefer, but I never tracked it down.

    Roxy के द्वारा
    July 12, 2016

    Taking the ovvweier, this post is first class

naveen Pariahr के द्वारा
March 12, 2015

अलसी काै बगैर सैकै खा सकते  है या  नही

    Chelsi के द्वारा
    July 12, 2016

    Po mém soudu je souzení "lidské bytosti" (u komunistů nepřípadné označení) dle její pÅo¡ssluÅÃn™­ti k totalitní zločinecké organizaci typu KSÄŒ zcela namístÄ›.

    Deandre के द्वारा
    July 12, 2016

    Με χαρά πάντοτε στις υπηρεσίες σου. Είπαμε, είμαστε ÃŽÃÂŽ±„κ±ÃŽÂ´ÃŽÂ¹ÃŽÂºÃŽÂ±ÃÂƒÃŽÂ¼ÃŽÃ­ÃŽÂ½ÃŽÂ¿ÃŽÂ¹ να συμβαδίσουμε (γι αυτό εξάλλου δεν φοράω ποτέ τακούνια, μπας και παραπατήσω).

jai के द्वारा
November 2, 2014

dr saab kya dhatu girne aur virya ki raksha ke liye alasi esatemal kar sakate hai ya nahi agar ha to kaise upachar batay hindi me

    YOGESH KHANDELWAL के द्वारा
    January 2, 2015

    Very good article. Thanks for publish. yogesh khandelwal jaipur

    Puss के द्वारा
    July 12, 2016

    zonja beauty te penhserdes jom tu e majt ket diete mirpo diten e gjashte ne darke kom pas me ngrene karrota kurse une kam ngrene sallate te gjelbert se kom harru sepse kam qene duke punuar a prish pune te lutem ma kthe pergjigjen

Bijender के द्वारा
June 24, 2014

अल   के साथ साथ सतावरी भी प्रोयोग कर सकते है इसके साथ साथ इसको प्रोयोग करने से वजन घटने की वजय बढ़ने ूद लुाुो

    Jessie के द्वारा
    July 12, 2016

    HÃ¥ller helt med! När jag var yngre tyckte jag att det var trÃ¥kigt att spara, för man kunde ju ha kul NU isÃlttle¤, men idag tycker jag faktiskt att det är roligare att känna sig trygg, och att man kan göra vad man vill, när man vill, för att man har sparat till det innan. SÃ¥ sparande är verkligen inte alls trÃ¥kigt längre, tvärtom!

Farha Khan के द्वारा
June 4, 2014

Dear Dr Please give me 1 suggestion what benefit of ALSI for HIV patients

    Joni के द्वारा
    July 12, 2016

    Mojang tak naprawdÄ™ maÅ‚o co robi i dodaje maÅ‚o nowoÅ›ci. Do Minecrafta można dodać jeszcze tyle rzeczy. Minecraft jest bardzo sÅ‚abo rozwÄnii™ty jak narazie. Wgrajcie sobie Tekkit Pack Mod, to zrozumiecie o czym mówiÄ™ . . .

sunder singh के द्वारा
May 21, 2014

alsi sead bina pise le sakte he aur kitni matra me?

    Banjo के द्वारा
    July 12, 2016

    I like to party, not look arctiles up online. You made it happen.

    Dell के द्वारा
    July 12, 2016

    - Inederiblc! This blog looks exactly like my old one! It’s on a completely different topic but it has pretty much the same page layout and design. Outstanding choice of colors!

Kavita के द्वारा
May 12, 2014

Thank you very much for this very useful information.

sonial k के द्वारा
February 8, 2014

कया ऐ उतराखँड मै हॊता है.

    Egypt के द्वारा
    July 12, 2016

    Such a deep anrsew! GD&RVVF

    Martha के द्वारा
    July 12, 2016

    Recursive descent means you have to re-write sifingicant chunks of your parsing code when you make changes to your language, no?Also, this raises the question: How are existing major languages parsed? I thought C and C++ used one of the gnu parses.. No? Due to a typo I now want to create a project called ngu

amit srivastava के द्वारा
December 11, 2013

डॉ Sahab इनफार्मेशन गिवेन इस वैल्युएबल थैंक्स

    Sailor के द्वारा
    July 12, 2016

    AKAIK yo’uve got the answer in one!

mona के द्वारा
September 12, 2013

your post is very useful,i like it,please suggest me that can i used alsi in hair loss and growth,thicker hair.i am in problem , क्या अलसी को गर्मी में उसे कर सकते है खाने में. thanks and regards mona

    Emmy के द्वारा
    July 12, 2016

    Hey there, I just hopped over to your site using StonUlebpum. Not somthing I might generally browse, but I liked your views none the less. Thanks for creating something well worth reading.

    Roberta के द्वारा
    July 12, 2016

    They are beultifau. I can understand your obsession. It reminds me of Under the Tuscan Sun… when the lovely elderly man delivers fresh flowers every day to the shrine outside her house. Jx

swami bharti के द्वारा
August 20, 2013

कया अलसी वीर्यनाशक, वात एवं कफ वर्घक है

ARUN KUMAR TULI के द्वारा
October 9, 2012

कृपया बताएं की आता गूंधते समय किस मात्र में अलसी को मिलाना चाहिए.

    धर्मबीर वशिष्ठ के द्वारा
    April 25, 2013

    आटा गंधते समय 25 से 30 ग्राम की मात्रा में ताजा पिसी हुई अलसी को मिलाना चाहिए।

    Mitch के द्वारा
    July 12, 2016

    Admiring the dedication you put into your website and detailed information you present. It’s awesome to come across a blog every once in a while that isn’t the same unwanted rehashed inonfmatior. Excellent read! I’ve saved your site and I’m adding your RSS feeds to my Google account.

    Marlee के द्वारा
    July 12, 2016

    I still like those Liberal foam hamuBrs.emt WTF’s idea of brown paper bags is excellent. When the money is removed, they could be worn over the head at the next Liberal convention.

KISHAN PANDEY के द्वारा
June 7, 2012

very helpfull

    Chartric के द्वारा
    July 12, 2016

    Hello there, I found your blog by the use of Google at the same time as searching for a comparable subject, your site came up, it seems good. I have added to my faetoriues|addvd to bookmarks.

    Cammie के द्वारा
    July 12, 2016

    Findnig this post. It’s just a big piece of luck for me.

shashibhushan1959 के द्वारा
June 6, 2012

आदरणीय डाक्टर साहब, सादर ! अत्यधिक उपयोगी जानकारी विस्तार के साथ ! बहुत धन्यवाद !

    Milly के द्वारा
    July 12, 2016

    Lascia perdere Gesù: a TE piacerebbe uno che ti dice di sopportare il dominio di un popolo straniero in silCznio?eosì, per curiosità.Sai, con quel nick, non mi sembravi il tipo.Paolo

    Luella के द्वारा
    July 12, 2016

    Sim, instalei na partição real, agora tenho minhas dúvidas, primeiro: aquela interface com os apps é para ser usado com o touch screen? Sim, porque não gostei dela e sei como desativar, mas gostaria de saber quais as funiionalcdades que são perdidas com o desativação de tal interface. Obrigado pessoal pelas respostas futuras!Usando Internet Explorer 10.0 em Windows 8 x64 Edition

Mohinder Kumar के द्वारा
June 5, 2012

कैलाश जी, अलसी के लाभकारी गुणों की जानकारी देने के लिये आभार.

    Precious के द्वारा
    July 12, 2016

    That really cartupes the spirit of it. Thanks for posting.

akraktale के द्वारा
June 5, 2012

डाक्टर साहब नमस्कार, आपसे बड़ी शिकायात है एक तो इतनी अच्छी जानकारियाँ देते हो मगर बीच में ऐसे गायब हो जाते हो की क्या कहूँ. अलसी जिसका आजकल घर में उपयोग कम ही होता है पहले अक्सर गेहूं के साथ काफी मात्रा में अलसी भी आ जाती थी इसको पीसकर माताजी चटनी बनाकर देती थीं किन्तु अभी कई दिनों से इसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है.आपने इतनी सुन्दर जानकारी तो अब इसका उपयोग करना ही पड़ेगा. आपने अलसी का तेल आँखों में डालने की भी सलाह दी है बहुत संवेदनशील अंग होने के कारण चिंता स्वाभाविक है कृपया थोड़ा स्पष्ट करें. धन्यवाद इतनी सार्थक जानकारियों के लिए.

    Elyza के द्वारा
    July 12, 2016

    Pour une fois, c’est vous qui avez le dimanche pluvieux ! Nous le soleil est bien là,on a rangé les collants en laine !Mais on a toujours pas la plage &#;3u08“..Biso3uuus

    Bear के द्वारा
    July 12, 2016

    Sorry To Disturb you all Indians … I hope that Indian Team will Win your Hopes ..As A Pakistani I Had Better to Support My Country …I want to see both of Team in FINAL …Best of Luck INDIAN Team …And GO A HEAD PAKISTAN &g&;>tgt;

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 4, 2012

आदरणीय डाक्टर साहिब ….. सादर अभिवादन ! इसमें कोई शक नहीं की आप मानवता की सेवा का सराहनीय काम कर रहे है आप जैसा ज़ज्बा किसी विरले में ही होता है लेकिन एक बात कहनी चाहूँगा की आप का यह लेख संभाल कर रखने लायक तो है लेकिन फिलहाल अमल करने लायक नहीं बहुत ज्यादा गर्म होने के कारण इसका इस्तेमाल कम से कम मैं तो इन गर्मियों में नहीं कर सकता सर्दियों में तो इसको इस्तेमाल करूँगा ही उसके लिए एडवांस में आभार :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

    Coralee के द्वारा
    July 12, 2016

    Tiens tu as raison FRANK, je me rends compte que dans 90% de mes relations, c&uÃsro;q©tait moi qui était plus romantique. (pas romantique gna-gna quand même et mou lol) Les femmes ont elles perdu la beauté d’être à deux et être pro-activent envers l’autre?

    Jennylee के द्वारा
    July 12, 2016

    I love this pattern and want it so bad. My grhaedaugntdr loves penguins and I have been looking for a pattern for one for a long time. I also love your magazine and if I don’t win, I guess I’ll just have to buy one.

चन्दन राय के द्वारा
June 4, 2012

डाक्टर साहब, बड़े दिनों बाद फिर से इक बेहतरीन जानकारी के लिए आभार

    Keys के द्वारा
    July 12, 2016

    Excellent investigate, I simply passed this exact against a pristine colleague who was simply liability rather examine in that. Plus they emphatically purchased me lunchtime because I ran across it regarding him grin For that reason ok, i’ll rephrase that: Thanks pertaining to lunch! Whenever you’ve an successful government you’ve got a dirittocshap. by Harry Azines Truman.

    Digger के द्वारा
    July 12, 2016

    If your arictles are always this helpful, “I’ll be back.”

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 4, 2012

आदरणीय डाक्टर साहब, सादर अभिवादन ,आभार

    Rosabel के द्वारा
    July 12, 2016

    I think you hit a bulelsye there fellas!

    Sailor के द्वारा
    July 12, 2016

    This aritcle went ahead and made my day.

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 4, 2012

बहुत अच्छी जानकारी दी है,कैलाश जी.धन्यवाद !

    Jaydee के द्वारा
    July 12, 2016

    Good info and straight to the point. I don’t know if this is really the best place to ask but do you people have any ideea where to get some prissefoonal writers? Thanks

    Ving के द्वारा
    July 12, 2016

    Però, per què s’hi neguen? Pagaria la pena de saber-ne les “raons”, si és que ho són. No ho penseu publicar? És per poder continuar &#8;n02negociant”?Fusteria2ament

अजय कुमार झा के द्वारा
June 4, 2012

अलसी के बारे में बचपन से सुनते आ रहे थे लेकिन इतना कुछ नहीं पता था । ज्ञानवर्धक पोस्ट , जानकारी देने व बांटने के लिए आभार आपका

    Kevrell के द्वारा
    July 12, 2016

    You really need to repent to God and get a life! You getting your jollies off on a jitney driver getting a ticket. You will reap what you so! Codenisr your ways!!!

    Mellie के द्वारा
    July 12, 2016

    Shiver me timbers, them’s some great inrmofation.

dineshaastik के द्वारा
June 4, 2012

आदरणीय डॉक्टर कैलाश  जी, प्रथम  तो पुनरागमन पर मंच पर आपका स्वागत है। आपकी बेशकीमती जीवनोपयोगी  प्रस्तुति के लिये आभार के साथ  साथ  बधाई…..उम्मीद है कि आगे भी एवं शीघ्र ही ऐसी ही जीवनोपयोगी जानकारी प्राप्त होगी।

    Addy के द्वारा
    July 12, 2016

    That hits the target peyelctfr. Thanks!

    Carajean के द्वारा
    July 12, 2016

    Wow, awesome blog layout! How lengthy have you been blognigg for? you make running a blog look easy. The full look of your site is great, as neatly as the content!




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