Dr.KAILASH DWIVEDI

NATUROPATHY TREATMENT

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गंजापन दूर करने के लिए करें यह योग !

Posted On: 3 Feb, 2016  
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हींग के औषधीय उपयोग

Posted On: 1 Feb, 2016  
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मिर्गी (Epilepsy)

Posted On: 17 Jul, 2014  
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स्वरयोग के चमत्कार :

Posted On: 7 Jul, 2014  
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कब्ज की प्राकृतिक चिकित्सा

Posted On: 1 Jan, 2014  
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302సమీక్ష వెన్నెలంత చల్లగా ఆసక్తికరంగా సాగింది. మరిన్ని సమీక్షలు àÂÂÚేయà°°•Ã Â±Â‹Â Â°Â°Ã Â±ÂÃ Â°Â¤Ã Â°Â¾Ã Â°Â¨Ã Â±Â. సమీక్ష చేయటమా లేక ఆ సమయంలో మరో ఆసక్తికరమైన పుస్తకం చదవటమా అన్న మీమాంస ఎప్పుడూ ఉండక తప్పదులెండి.

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पके टमाटर का रस एक कप पीने से पुरानी से पुरानी कब्ज दूर होती है और आंतों को ताकत भी मिलती है। रात में सोते समय 1 से 2 चम्मच अलसी के बीज ताजा पानी से निगल लें। आंतों की खुश्की दूर होकर मल साफ होगा। 2 अंजीर को रात को पानी में भिगोकर सुबह चबाकर पानी पीने से पेट साफ हो जाता है। गाजर के रस का रोजाना सेवन करने से कोष्ठबद्धता (कब्ज) ठीक हो जाती है। ऐसे व्यक्ति अर्श (बवासीर) रोग से सुरक्षित रहते हैं। गिलोय का बारीक चूर्ण को गुड़ के साथ बराबर की मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच सोते समय सेवन करने से कब्ज का रोग दूर हो जाता है। अजवायन 10 ग्राम, त्रिफला 10 ग्राम और सेंधानमक 10 ग्राम को बराबर मात्रा में लेकर कूटकर चूर्ण बना लें। रोजाना 3 से 5 ग्राम इस चूर्ण को हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करने से काफी पुरानी कब्ज समाप्त हो जाती है। थूहर के दूध में कालीमिर्च, लौंग या पीपल भिगोकर सुखा लें। कब्ज से परेशान व्यक्ति को कालीमिर्च या लौंग खिला देने से पेट बिल्कुल साफ हो जाता है। सोते समय 1 चम्मच साबुत मेथी दाने को पानी के साथ पीने से कब्ज दूर होगी। 4 चम्मच सौंफ 1 गिलास पानी में उबालें। जब आधा पानी रह जाये तो छानकर पीने से कब्ज दूर हो जायेगा।

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Aadrniy daktr sahib ..... सादर अभिवादन ! बहुत ही बढ़िया प्रयास है यह आपका जनसेवा की भावना लिए हुए ..... अब देखना यह रहेगा की कितने लोग आपके अनुभवों का फायदा ले पाते है ..... एक उपयोगी और सम्पूर्ण लेख पर मुबारकबाद कबूल फरमाए ..... वैसे मेरी यही कामना है की जिनके भी जोड़ो में दर्द है वोह आपके नुस्खे आजमाए और भांगड़ा तथा गिद्दा डालते हुए आपको मुबारकबाद देने के लिए आये ..... हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

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शारीरिक निर्बलता- मिटटी के बर्तन में भुने हुए गेहूं लेकर पीस लें | लगभग १५ ग्राम की मात्रा में इस पाउडर को लेकर २० मिली. पानी में धीमी आंच पर ५ मिनट तक पकाएं | पकाते से समय इसे चम्मच चलाते रहें तत्पश्चात आवश्यकतानुसार दूध व गुड या चीनी मिलकर सेवन करें | Aadrniy डाक्टर साहिब ..... सादर प्रणाम ! जब आप इतना प्यार लुटाते हुए मुझ अढ़टीस साल के पापी +नीच +कामी +क्रोधी +कपटी एंग्रीयंगमैन को प्रणाम कह सकते है तो आप तो लाखों जनों के जीवनदाता (रब्ब का दूसरा रूप ) सज्जन पुरुष कप मैं क्योंकर ना नमन करूं ..... मैं जब अपने फेमिली डाक्टर के पास जाता हूँ तो उनके चरण स्पर्श करता हूँ ..... को साल पहले एक गलती के फलस्वरूप जब मेरी जिंदगी पर बन आई थी तो मुझ गरीब पर उन्होंने अपनी अनुकम्पा बरसाई थी ..... आपरेशन से बचा कर सिर्फ खाने वाली दवाई से मेरी जीवन रक्षा की थी ..... आपने अनजाने में ही मेरी मदद इस लेख में कर ही दी है ..... धन्यवाद सहित ढेरों आभार

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डॉ भाई नमस्कार मिट्टी का महत्व हमारे आयुर्वेद में है ही लेकिन विदेश में भी है । एक छोटी सी घटना ईस बात को साबीत करती है । एक बहुत पूराने अमरिकी प्रमुख की पडोसन अपने बच्चे को फटकार रही थी क्यों की वो मिट्टी में खेल रहा था । प्रमुख ने पडोसन को डांट दिया.. बच्चा मिट्टी से खेलेगा नही तो मजबूत नागरिक कैसे बनेगा, खेलने दो उसे... आप ने अच्चे ईलाज बताये जो हम नही जानते हैं । धन्यवाद आपका । एक बात आप से छुट गई हैं, जो दादी मां के ईलाज के अन्तर्गत है, मिट्टी खाने का ईलाज । आप लोगोने शायद दवाई बना ली है वरना कुछ साल पहले प्रेगन्सी के दौरान औरतों के शारिर में कुछ कमी हो जाती थी और उसे मिट्टी खाने की प्रबल ईच्छा हो जाती थी और उसे मिट्टी खानी ही पडती थी । बाकायदा दुकानदार भी अपनी दुकान में रखते थे, वो खास मिट्टी थी गुजराती लोग उसे भुतडा कहते हैं । मिट्टी खाना पहले भी आज की तरह शरम की बात ही थी, पर ईलाज तो ईलाज है, बहु चोरीछुपे ईधर उधर की गन्दी मिट्टी खा न ले ईस लिये सास या जेठानी ही भुतडे का प्रबन्ध करती थी ।

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आदरणीय शुक्ल जी सादर प्रणाम ! -प्रकृति प्रदत्त प्रत्येक वस्तु का उपयोग उसका स्वरूप नष्ट किये बिना जाना कठिन अवश्य है पर असंभव नहीं है| उदहारण के तौर पर गेहूं को ही ले लीजिये - गेहूं को उसका स्वरूप नष्ट किये बिना खाना कठिन है परन्तु गेहूं का आटा बनाकर उसकी चोकर सहित [बिना छाने ] रोटी बनाकर खाया जा सकता है जो की स्वास्थ्य के लिए हितकर है परन्तु गेहूं के आटे को छानकर उसको पूड़ी के रूप में तलकर खाना ठीक नहीं क्योंकि इस प्रक्रिया में गेहूं का स्वरुप बहुत परिशोधित हो जाता है जो कि प्रकृति के विरुद्ध है | तभी तो यह कहा है कि यह आवश्यक है कि कच्चा भोजन को रुचिकर बनाने की कला का विकास किया जाना चाहिए |

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आदरणीय अब्दुल रशीद भाई , सादर अभिवादन ! आयुर्वेद हमारी प्राचीनतम चिकित्सापद्धति है , इस पर संदेह नहीं परन्तु यह बिडम्बना अवश्य है कि लालचवश कुछ आयुर्वेद चिकित्सक धड़ल्ले से एलोपैथी की प्रैक्टिस कर रहे हैं | आयुर्वेद/ प्राकृतिक चिकित्सा रोग की जड़ पर कार्य करती है जबकि एलोपैथी सिर्फ रोग लक्षणों को दबाती है , परन्तु इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आपातकाल एवं शल्यक्रिया के क्षेत्र में एलोपैथी ने काफी उन्नति की है | रक्तचाप बढ़ने का एक प्रमुख कारण है रक्त में कोलेस्ट्रोल और ट्राईग्लिसराईड की मात्रा बढ़ना | भोजन में नमक व् तेल, घी की मात्रा कम करने से एवं प्रातः खाली पेट लहसुन की दो-तीन कली पानी के साथ निगलने से कोलेस्ट्रोल और ट्राईग्लिसराईड की मात्रा नियंत्रित हो जाती है |

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रोशनी जी, नमस्कार! क्षमा मांगने जैसी कोई बात नहीं है क्योंकि मेरे ब्लॉग में कहीं भी मेरा नाम नही लिखा था, वह तो मै प्रतिक्रियाओं में अपना नाम लिखने लगा जिस से सब को पता चला | आपका प्रश्न है कि- ' जिन लोगों को बहुत खांसी आती है और खासी पुरानी भी हो उन्हें योग करना चाइए या नहीं?' इस सन्दर्भ में बताना चाहूँगा कि सबसे पहले यह पता लगाना जरुरी है कि उनकी खांसी का कारण क्या है , यदि यह किसी संक्रामक रोग जैसे ' क्षय रोग ' की बजह से है तो योग में आसन न करके केवल अनुलोम विलोम प्राणायाम करें, इससे क्षय में बहुत लाभ होगा | सामान्य खांसी में जिस समय खांसी कंट्रोल में हो उस समय योग आसन कर सकते हैं क्योंकि आसन में श्वास-प्रश्वास का बहुत महत्व है , खांसी की अवस्था में श्वास का नियमन नहीं हो सकता इस लिए जिस समय खांसी कंट्रोल में हो उसी समय आसन करें , खांसी आने पर आसन रोक दें | सामान्य होने पर पुनः शुरू करें |

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